लखनऊ: संसद में आज वक्फ संशोधन बिल पेश होने वाला है. हालांकि जितनी बार इसपर चर्चा हुई विपक्ष की ओर से उतनी ही बार विरोध हुआ. ऐसे में आज संसद में ये बिल पेश होने के बाद विपक्ष इसका विरोध करने के लिए तैयार है. कुछ मुसलमान इस बिल का विरोध कर रहे हैं तो वहीं एक बड़ा तबका इसके पक्ष में हैं. बरेली के मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने एक बयान देकर वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करते हुए कहा कि “AIMPLB मुस्लिमों को डरा रहा है. बिल से मुस्लिमों को कोई खतरा नहीं है”.
दरअसल, केंद्र सरकार के दो मंत्रालय भारतीय रेलवे और रक्षा मंत्रालय देश के अंदर सबसे ज्यादा जमीनों का मालिकाना हक रखते हैं. सरकार के बाद भारत में अगर कोई सबसे बड़ा भू स्वामी है तो वो वक्फ बोर्ड ही है. सरकार के बाद जमीनों के मालिकाना हक में पहले नंबर पर वक्फ बोर्ड का नाम ही आता है. इसके बाद दूसरे नंबर पर कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया आता है. इन दोनों के पास देश में बहुत सारी संपत्तियां हैं. अगर कुल क्षेत्रफल की बात करें तो वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा जमीन होने के आंकड़े मौजूद हैं.
देशभर में वक्फ संपत्ति-
देश भर में वक्फ बोर्ड के पास करीब 9.4 लाख एकड़ जमीन है. वहीं, कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया के पास 2 से 3 लाख एकड़ जमीन है. वक्फ बोर्ड भारत में तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामी माना जाता है. वक्फ असेट मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया-WAMSI के मुताबिक साल 2022 के दिसंबर महीने तक वक्फ बोर्ड के पास करीब 8 करोड़ 72 लाख अचल संपत्तियां दर्ज थीं. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वक्फ के पास कुल जमीन 9 करोड़ 4 लाख एकड़ से भी अधिक जमीन होने का अनुमान है. ये आंकड़ा समय के साथ-साथ और भी बढ़ता रहा है, क्योंकि साल 2009 में ये आंकड़ा लगभग 4 लाख एकड़ का था. वक्फ की संपत्तियों में मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान, अन्य धार्मिक और सामुदायिक उपयोग की जमीनें शामिल हैं.
UP में वक्फ संपत्ति-
वहीं, अगर बात करें अगर उत्तर प्रदेश की तो यहां पर शिया वक्फ बोर्ड के पास जहां लगभग 15,386 संपत्तियां हैं. तो वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड के नाम भी करीब 2,10,239 से ज्यादा की संपत्तियां दर्ज हैं. राज्य के संभल, रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा जैसे जिलों में तो और भी बड़ी संख्या में वक्फ की संपत्तियां बताई जा रही हैं.
क्या होती है वक्फ संपत्ति?-
वक्फ संपत्ति उन अचल संपत्तियों को कहते हैं, जो इस्लामिक कानून के अनुसार धार्मिक या परोपकारी कार्यों के लिए दान की जाती हैं. अगर किसी मुस्लिम व्यक्ति की कोई औलाद नहीं होती, तो उसकी मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति वक्फ बोर्ड के अधीन हो जाती है. हालांकि कुछ लोग तो स्वेच्छा से ही अपनी संपत्ति वक्फ बोर्ड को दान कर देते हैं, जिससे उसका उपयोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए किया जा सके.
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