वाराणसी: देश में मुगल आक्रांताओं और मुस्लिम शासकों पर होने वाले उत्सवों और आयोजनों का चौतरफा लगातार विरोध हो रहा है. संभल में इस बार जहां सैयद सालार मसूद गाजी की याद में लगने वाले नेजा मेले की इजाजत प्रशासन ने नहीं दी है. तो वहीं PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 50 से अधिक गली और मोहल्लों के नाम में परिवर्तन किया जाएगा.
प्रशासन की ओर से इसके लिए खाका तैयार कर लिया गया है. इनमें ज्यादातर मुहल्ले ऐसे है जिनके नाम मुस्लिम आक्रांताओं और मुस्लिम शासकों के नाम पर है. इन मुहल्लों में प्रस्ताव में खालिसपुरा का नाम ब्रह्मतीर्थ, मदनपुरा का पुष्पदंतेश्वर और औरंगाबाद का नाम परशुराम चौक करने की तैयारी है. इसी तरह 50 से अधिक मोहल्लों के नाम बदले जाएंगे.
बता दें कि पिछले दिनों इसको लेकर हिंदूवादी संगठनों ने प्रदर्शन किया था और महापौर को एक मांगपत्र भी सौंपा था. तो वहीं इसके लिए कई हिंदूवादी संगठनों और तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भी काशी के मुस्लिम मोहल्लों के नाम बदलने की मांग की थी. बीते 24 मार्च को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने नाम बदलने की वकालत की थी.
उन्होंने कहा कि काशी में कई ऐसे मोहल्ले हैं, जिनका नाम मुगल आक्रांताओं के नाम पर है. जिस पर उन्होंने कहा था कि जितने भी नाम ऐसे हैं उन सभी नामों को बदलने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इसके लिए वो प्रधानमंत्री मोदी से भी बात करेंगे. फिलहाल सबसे पहले औरंगाबाद के नाम को बदलने के लिए नगर निगम के प्रशासन ने तैयारी की है और आज कार्यकारिणी की बैठक में इस प्रस्ताव के साथ रखा जाएगा और अंतिम चरण इसका मेरी सदन की बैठक में सभी पार्षदों की सहमति के बाद पूर्ण होगा.