कानपुर: जिले से साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विदेश में नौकरी कर ज्यादा पैसे कमाने के सपने देखने वालों को सोंचने पर मजबूर कर दिया है. यहां पर साइबर क्राइम की टीम ने गिरोह के मास्टर माइंड और दो युवतियों को पकड़ा है. इससे पहले लखनऊ में साइबर पुलिस और मदेयगंज पुलिस की टीम ने इंटर नेशनल साइबर गिरोह के जीशान खान नाम के आरोपी समेत 3 को गिरफ्तार किया था. ये आरोपी भी लोगों को विदेश में नौकरी का झांसा देने के बाद उन्हें विदेश ले जाकर उनसे साइबर ठगी कराते थे.
कानपुर में पकड़े गए आरोपी देशभर से करीब 1 करोड़ 20 लाख लोगों को ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और दुबई में नौकरी दिलाने का झांसा दे चुके हैं. पकड़े गए आरोपी पहले नौकरी डॉट कॉम जैसी नामी वेबसाइटों से लोगों का डाटा चुराते थे. फिर बाद में वीडियो काल पर कई चरणों में फर्जी इंटरव्यू कराकर मोटी रकम वसूलते थे. क्राइम बांच की ओर से साल 2015 से इस सक्रिय गिरोह में शामिल 15 से 20 और लोगों की तलाश की जा रही है.
आरोपियों के पास से 3 लैपटाप, 9 स्मार्टफोन, 14 कीपैड मोबाइल, 8 सिम कार्ड, राउटर, बैंक पासबुक, डेबिट कार्ड समेत कई दस्तावेज और कार बरामद हुई है. ठगी का शिकार होने वालों में डॉक्टर, इंजीनियर, बड़ी कंपनियों में मैनेजर पद पर काम करने वाले, उनमें भी अधिकतर दक्षिण के राज्यों के लोग शामिल हैं. किसी को शक न हो, इसके लिए ये साइबर ठग छोटी-छोटी रकम ही ठगते थे. क्राइम ब्रांच के मुताबिक, गिरोह ने लोगों से अब तक लगभग 3 से 4 करोड़ रुपए की ठगी कर चुके हैं.
वहीं, क्राइम ब्रांच के DCP एसएम कासिम आबिदी का कहना है कि इस गैंग में कानपुर के कल्याणपुर, आवास विकास और काकादेव इलाकों की कई अन्य लड़कियां भी शामिल थीं. ये लड़कियां लोगों को ठगने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा का इस्तेमाल करती थीं. खासकर उर्दू भाषी लोगों को निशाना बनाने के लिए अरीबा जैसी युवतियां उनकी ही भाषा में बातचीत और उनका इंटरव्यू करती थीं, जिससे लोग आसानी से उनके झांसे में फंस जाते थे.
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