नई दिल्ली: बॉलीवुड पुरानी देशभक्ति की फिल्मों शानदार अभिनय करने वाले दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार का शुक्रवार की सुबह 87 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सास ली. मनोज कुमार ने पूरब और पश्चिम, उपकार, क्रांति और रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय करके लोगों के दिलो दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी थी. उनकी ‘पूरब और पश्चिम’ फिल्म के मशहूर गीक ‘भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं…’ से ही हर 26 जनवरी और 15 अगस्त की सुबह की शुरुआत होती है.
ऐसे शुरू हुआ फिल्मी कैरियर-
दरअसल, मनोज कुमार का जन्म ब्रिटिश भारत (वर्तमान में खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान) के उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत के एक शहर एबटाबाद में एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका जन्म का नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था. जब वो 10 साल के थे, तो उनका परिवार विभाजन की वजह से जंडियाला शेर खान से दिल्ली आ गया. फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने से पहले मनोज कुमार ने हिंदू कॉलेज से कला स्नातक की डिग्री हासिल की. जब वो छोटे थे, तो वो अभिनेता दिलीप कुमार, अशोक कुमार और कामिनी कौशल की प्रशंसा करते थे. उन्होंने शबनम में दिलीप कुमार के किरदार के आधार पर अपना नाम मनोज कुमार रखने का निर्णय लिया था.
‘भारत’ के नाम से जाने जाते थे मनोज कुमार-
देशभक्ति की फिल्मों में अहम किरदार निभाने वाले मनोज कुमार को ‘भारत’ के नाम से जाना जाता था, क्योंकि जिन देशभक्ति की फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया उनमें उनका नाम ‘भारत’ ही होता था. वो अभिनेता के अलावा फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक, गीतकार और संपादक भी थे. असल में मनोज कुमार अपनी देशभक्ति फिल्मों में भारत के नाम से जाने जाते थे. इसलिए लोग उन्हें भारत कुमार भी कहते थे. उन्होंने ‘क्रांति’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘उपकार’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी कई फिल्में बनाई और देशभक्ति के साथ-साथ समाज की कमियों और समाधान को अपनी फिल्मों में दिखाते थे. ‘उपकार’ उनकी एक ऐसी फिल्म थी, जिसकी स्क्रिप्ट महज 24 घंटे में लिखी गई. इस फिल्म को भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने बनाने के लिए कहा था. ये फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी और उस वक्त 6 करोड़ 80 लाख का कारोबार किया था.
मनोज कुमार की पहली बड़ी फिल्म-
मनोज कुमार ने साल 1961 में कांच की गुड़िया में पहली मुख्य किरदार निभाया. इसके बाद पिया मिलन की आस, सुहाग सिंदूर और रेशमी रुमाल आई, लेकिन इनमें से अधिकतर बिना किसी निशान के डूब गईं. फिर पहली बड़ी व्यावसायिक सफलता 1962 में विजय भट्ट की हरियाली और रास्ता माला सिन्हा के साथ मिली. हरियाली और रास्ता की अपार सफलता के बाद शादी डॉ. विद्या और गृहस्थी आई, जिनमें से तीनों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया. मुख्य भूमिका के रूप में मनोज कुमार पहली बड़ी सफलता साल 1964 में आई राज खोसला की रहस्य थ्रिलर ‘वो कौन थी’? से मिली, जिसका श्रेय इसकी दमदार पटकथा और मदन मोहन द्वारा रचित मधुर गीतों को दिया जाता है, जैसे “लग जा गले” और “नैना बरसे रिमझिम”, ये दोनों ही गाने सुर साम्राग्यी लता मंगेशकर ने गाए थे.
पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि-
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत मनोज कुमार को श्रद्धांजलि दी है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया X पर लिखा ‘महान अभिनेता और फिल्म निर्माता श्री मनोज कुमार जी के निधन से बहुत दुख हुआ. वह भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें विशेष रूप से उनकी देशभक्ति के उत्साह के लिए याद किया जाता था, जो उनकी फिल्मों में भी झलकता था. मनोज जी के कार्यों ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रज्वलित किया और यह पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा’. दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. “ओम शांति”