लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम में अब ट्रैफिक नियम का पाठ शामिल किया जाएगा. बेसिक स्कूलों में कक्षा 8 और माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई होती है. कहा जा रहा है कि छोटी उम्र से ही छात्र-छात्राओं को यातायात नियमों की जानकारी देकर उन्हे जागरूक किया जाएगा. वहीं, मध्य प्रदेश में 24 नवंबर साल 2024 से पाठ्यक्रम में यातायात का पाठ पढ़ाया जाना शुरू कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश में अभी तक विभिन्न जागरूकता रैलियों और कार्यक्रमों के जरिए ही स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को यातायात नियमों से रूबरू कराया जा रहा है, लेकिन पहली बार अब यातायात नियमों को स्कूलों के पाठ्य क्रम शामिल कर छात्रों को आवश्यक रूप से पढ़ाना अनिवार्य किया गया है. नए शिक्षण सत्र में यातायात के पाठ्यक्रम को जोड़ने के लिए शासन की ओर से निर्देश भी मिल गए हैं. इसके बाद अब जिला प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है.
इसके साथ ही स्कूल बस, वैन संचालकों और चालकों के लिए भी काफी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं. इसमें चालक-परिचालक की वर्दी, उनके कर्तव्य के बारे में बताया गया है. इसके अलावा ब्लैक स्पॉट पर सावधानियां बरतते हुए वाहनों को 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की सलाह दी गई है और ओवरटेक न करने की भी अपील की गई है. DIOS अरुण कुमार ने बताया कि सड़क हादसों की रोकथाम के लिए छात्रों को यातायात के नियम सिखाए जाएंगे. इसलिए यातायात की पढ़ाई और नियम को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.
वहीं, मध्य प्रदेश में भी सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए स्कूली छात्रों को पाठ्यक्रम के जरिए यातायात का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया है. इसकी शुरुआत शिक्षा सत्र 2025-26 से कक्षा 5 के विद्यार्थियों से की गई है. इसके लिए पुलिस मुख्यालय की ओर से 87 लाख पुस्तकें भी छपवाई गई हैं. पांचवीं से 12वीं तक क्रमश: हर साल नई कक्षा में नई किताब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई जाएंगी. पाठ्यक्रम भी इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि इसमें दोहराव न हो. साथ ही उनकी सामग्री विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर के अनुकूल हो.